# रोजनामचा 

By [Atul Arora](https://dylit.info/user/atul_1102)

[झाड़े रहो कलक्टरगंज ](https://dylit.info/pr/%25E0%25A4%259D%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25A1%25E0%25A4%25BC%25E0%25A5%2587-%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%25B9%25E0%25A5%258B-%25E0%25A4%2595%25E0%25A4%25B2%25E0%25A4%2595%25E0%25A5%258D%25E0%25A4%259F%25E0%25A4%25B0%25E0%25A4%2597%25E0%25A4%2582%25E0%25A4%259C/6a189bb592457128cb2f9161) > [रोजनामचा ](https://dylit.info/ch/%25E0%25A4%25B0%25E0%25A5%258B%25E0%25A4%259C%25E0%25A4%25A8%25E0%25A4%25BE%25E0%25A4%25AE%25E0%25A4%259A%25E0%25A4%25BE/6a189bc892457128cb2f9190)

महफ़िल-ए-सेल्फी में पेश है लानत फ़तह अली ख़ान और क़यामत फ़तह अली ख़ान की नशा ए सेल्फी पर जुगलबंदी महफ़िल-ए-सेल्फी में आपका स्वागत है! 🎤📸 सुरों के 'शहंशाह' और एंगल्स के 'बादशाह'—लानत फ़तह अली ख़ान और क़यामत फ़तह अली ख़ान आज लेकर आए हैं एक ऐसी मजेदार जुगलबंदी, जो कानों को नहीं, बल्कि सीधे आपकी 'मेमोरी स्टोरेज' पर प्रहार करेगी! क्या सेल्फी के चक्कर में आपने भी अपनी असली खुशियाँ खो दी हैं? 📸 आज के दौर में हम पल जीने से ज़्यादा उन्हें 'कैद' करने में व्यस्त हैं। क्लाउड में हज़ारों तस्वीरें हैं जिन्हें कोई दोबारा नहीं देखता, और शादियों की दावत में 'एंगल' ढूँढते-ढूँढते हम पकवानों का स्वाद भी भूल जाते हैं। यह व्यंग्यात्मक गीत सेल्फी के उस नशे पर एक तंज है जो हमें हकीकत से दूर ले जा रहा है। अगर आप भी कभी 'पाउट' बनाते हुए हकीकत भूल गए हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है! इस व्यंग्यात्मक कविता (Parody Song) के ज़रिए देखिए सेल्फी संस्कृति का एक मज़ेदार और गहरा पहलू। अगर वीडियो पसंद आए तो Like, Share और Subscribe ज़रूर करें! चेतावनी: इसे देखने के बाद शायद आप भी अपना फोन रखकर हकीकत की दुनिया में वापस आ जाएं! 😉 https://www.youtube.com/watch?v=GMISCMuNx7A
