# गप्पोष्ठी

By [Atul Arora](https://dylit.info/user/atul_1102)

[झाड़े रहो कलक्टरगंज ](https://dylit.info/pr/%E0%A4%9D%E0%A4%BE%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%95%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A4%97%E0%A4%82%E0%A4%9C/6a189bb592457128cb2f9161) > [गप्पोष्ठी](https://dylit.info/ch/%E0%A4%97%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A5%8B%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A0%E0%A5%80/6a189bd092457128cb2f91a3)

कानपुर का वो सच जो कनपुरिये भी नहीं जानते! ठग्गू के लड्डू से आगे का कानपुर! क्या आपको लगता है कि कानपुर का मतलब सिर्फ "बढ़िया चाट", "परेड की भीड़" और "ठग्गू के लड्डू" है? तो गुरु, आप अभी 'हाफ टिकट' भी नहीं हैं! आज की इस खास 'गपोष्ठी' में हमारे साथ जुड़ रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल जी जो इंडियन एक्सप्रेस समूह के हिंदी अखबार जनसत्ता के चंडीगढ़ और कलकत्ता संस्करण के संपादक रहे, अमर उजाला में कार्यकारी संपादक और Pebble के चीफ एडिटर रह चुके हैं और आजकल दैनिक हिंट के प्रधान संपादक तथा TV9 में रेगुलर ब्लॉगर हैं और मशहूर व्यंग्यकार अनूप शुक्ल जी। इस चर्चा में हम कानपुर की उन परतों को खोलेंगे जो नवीन मार्केट की रौनक और चमनगंज के शोर के पीछे कहीं छिप गई हैं। कानपुर की रगों में दौड़ते साहित्य और राजनीति के किस्से, यहाँ की 'कॉस्मोपॉलिटन खिचड़ी' और यहाँ के 'ब्रांडेड फक्कड़पन' की असली कहानी जानने के लिए तैयार हो जाइए। कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए, क्योंकि यह चर्चा आपको आपके अपने शहर से नए सिरे से मिलवाएगी! [00:00] - कानपुरिया अंदाज में स्वागत: सरसैया घाट और गंगा मैया की महिमा। [00:16] - पूरब का मैनचेस्टर: सिर्फ भौकाल या कुछ और? [00:48] - साहित्य और राजनीति: कानपुर का खोया हुआ गौरव। [00:59] - मेहमान परिचय: वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल और व्यंग्यकार अनूप शुक्ल। [01:27] - कानपुर की रईसी: जहाँ 'फक्कड़' भी ब्रांडेड होता है। [01:40] - जातियों का स्वैग और कनपुरिया ह्यूमर। [02:13] - बाजारों के पीछे का असली कानपुर। [45:13] - बिठूर का इतिहास: राजा अलमास अली और सिखों की जमींदारी। [46:21] - बिठूर में पर्यटन और नाना राव पेशवा की यादें। https://www.youtube.com/watch?v=xIWAcG048P8
