इस प्लेलिस्ट में देखिए हिंदी के मशहूर ब्लॉगरों और व्यंग्यकारों के साथ मजेदार बातचीत और हास्य से भरी चर्चाएँ!
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क्या आपने कभी सोचा है कि युद्ध के मैदानों और स्मारकों में कितनी कविताएँ छिपी होती हैं? देखिए कवि अभिनव शुक्ला के साथ हमारी यह छोटी सी मुलाकात, जहाँ हमने फिलाडेल्फिया के इतिहास और Valley Forge के स्मारकों पर चर्चा की। इतिहास, साहित्य और यात्रा का एक सुंदर संगम। जब इतिहास की कहानियाँ कविता की जुबानी सुनी जाती हैं, तो सफर यादगार बन जाता है। फिलाडेल्फिया यात्रा के दौरान, वैली फोर्ज स्मारक के सामने कवि अभिनव शुक्ला के साथ एक अनौपचारिक लेकिन सार्थक चर्चा। अमेरिकी क्रांति के त्याग और फिलाडेल्फिया के गौरवशाली अतीत की एक झलक।
https://www.youtube.com/watch?v=eR85xio04So
'गपोष्ठी' के इस विशेष अंक में हम लेकर आए हैं कानपुर और अवध की मिट्टी से जुड़ी होली की यादें। आखिर कानपुर में होली 7 दिनों तक क्यों मनाई जाती है? क्या है 'गंगा मेला' का इतिहास? और जब एक मध्यमवर्गीय परिवार की महिला पहली बार न्यूयॉर्क के लिए हवाई जहाज में बैठती है, तो क्या-क्या हास्य अनुभव होते हैं?
आज की चर्चा में हमारे साथ जुड़ रहे हैं:
अनूप शुक्ला 'फुर्सतिया' (मशहूर व्यंग्यकार)
शंभूनाथ शुक्ल (जनसत्ता के चंडीगढ़ और कलकत्ता संस्करण , अमर उजाला में भूतपूर्व संपादक, Pebble के चीफ एडिटर वर्तमान में दैनिक हिंट के प्रधान संपादक तथा TV9 में रेगुलर ब्लॉगर)
बिंदेश्वरी जी (न्यूयॉर्क से, हिंदी/अवधी की विदुषी)
अभिनव शुक्ल (हास्य कवि)
अतुल (मेजबान)
इस वीडियो में आपको सुनने को मिलेगी बेहतरीन अवधी कविताएं, कानपुर के 'देशज' शब्दों का जादू और पुरानी यादों का पिटारा।
Video Timestamps
[00:00] - गपोष्ठी की शुरुआत और मेहमानों का परिचय
[00:20] - कानपुर में 7 दिन की होली का रहस्य और गौरव
[04:00] - बिंदेश्वरी जी की नवाबगंज (कानपुर) की होली की यादें
[08:50] - शाहजहाँपुर की अनूठी 'नवाब साहब' वाली होली की परंपरा
[11:45] - गंगा मेला का इतिहास और सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल
[19:25] - विशेष आकर्षण: बिंदेश्वरी जी की "पहली हवाई यात्रा" - अवधी हास्य कविता
[26:20] - कानपुरिया शब्दों का जादू: 'पखरा', 'कुचरना' और 'सोहराना' का अर्थ
[32:45] - हास्य और व्यंग्य के बीच का बारीक अंतर
[39:40] - अभिनव शुक्ल द्वारा होली पर खूबसूरत छंद
https://www.youtube.com/watch?v=CLM8k9fYseY
क्या आपने कभी सोचा है कि 90 के दशक या साल 2000 की शुरुआत में जब न Google था, न Facebook और न ही हाथ में सेलफोन, तब विदेशी धरती पर पहली बार उतरने पर क्या बीतती होगी?
जब एयरपोर्ट पर कैब वाला न मिले, रेस्टोरेंट में वेजिटेरियन खाना माँगने के लिए जद्दोजहद करनी पड़े, या एक पड़ोसन जो इंग्लिश/हिंदी दोनों ही नहीं जानती वह आपको कैसे समझाए कि आपके घर में उसने सांप घुसते देखा है! ये स्थितियाँ या तो आपको रुला सकती हैं या फिर ताउम्र के लिए एक बेहतरीन 'हास्य-व्यंग्य' बन सकती हैं। 😅
https://www.youtube.com/watch?v=i7wfs2GILBE
क्या आपको लगता है कि कानपुर का मतलब सिर्फ "बढ़िया चाट", "परेड की भीड़" और "ठग्गू के लड्डू" है? तो गुरु, आप अभी 'हाफ टिकट' भी नहीं हैं!
आज की इस खास 'गपोष्ठी' में हमारे साथ जुड़ रहे हैं वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल जी जो इंडियन एक्सप्रेस समूह के हिंदी अखबार जनसत्ता के चंडीगढ़ और कलकत्ता संस्करण के संपादक रहे, अमर उजाला में कार्यकारी संपादक और Pebble के चीफ एडिटर रह चुके हैं और आजकल दैनिक हिंट के प्रधान संपादक तथा TV9 में रेगुलर ब्लॉगर हैं और मशहूर व्यंग्यकार अनूप शुक्ल जी। इस चर्चा में हम कानपुर की उन परतों को खोलेंगे जो नवीन मार्केट की रौनक और चमनगंज के शोर के पीछे कहीं छिप गई हैं।
कानपुर की रगों में दौड़ते साहित्य और राजनीति के किस्से, यहाँ की 'कॉस्मोपॉलिटन खिचड़ी' और यहाँ के 'ब्रांडेड फक्कड़पन' की असली कहानी जानने के लिए तैयार हो जाइए। कुर्सी की पेटी बाँध लीजिए, क्योंकि यह चर्चा आपको आपके अपने शहर से नए सिरे से मिलवाएगी!
[00:00] - कानपुरिया अंदाज में स्वागत: सरसैया घाट और गंगा मैया की महिमा।
[00:16] - पूरब का मैनचेस्टर: सिर्फ भौकाल या कुछ और?
[00:48] - साहित्य और राजनीति: कानपुर का खोया हुआ गौरव।
[00:59] - मेहमान परिचय: वरिष्ठ पत्रकार शंभूनाथ शुक्ल और व्यंग्यकार अनूप शुक्ल।
[01:27] - कानपुर की रईसी: जहाँ 'फक्कड़' भी ब्रांडेड होता है।
[01:40] - जातियों का स्वैग और कनपुरिया ह्यूमर।
[02:13] - बाजारों के पीछे का असली कानपुर।
[45:13] - बिठूर का इतिहास: राजा अलमास अली और सिखों की जमींदारी।
[46:21] - बिठूर में पर्यटन और नाना राव पेशवा की यादें।
https://www.youtube.com/watch?v=xIWAcG048P8
इस वीडियो में ब्लॉगिंग, व्यंग्य लेखन और साहित्यिक दुनिया की वो सच्चाइयाँ सामने आती हैं, जिन पर अक्सर लोग डिस्क्लेमर लगा कर बचना चाहते हैं — लेकिन कभी-कभी असली पात्र खुद सामने आ जाते हैं 😄
यह एक खुली, बेबाक और हास्य-व्यंग्य से भरपूर चर्चा है, जहाँ बात होती है:
व्यंग्य लिखने के खतरे
“इसका किसी जीवित या मृत व्यक्ति से कोई संबंध नहीं…” का सच
राजा का बाजा जैसी कहानियों से उठे बवाल
कंटाप, झापड़ और कनपुरिया शब्दकोश
कवि सम्मेलन, संतोष आनंद, परसाई और फ़िराक़ गोरखपुरी के किस्से
दारू छोड़ने पर समाज की प्रतिक्रिया 😄
रिश्ते, स्मृतियाँ और साहित्य का मौखिक जादू
यह वीडियो उन सभी के लिए है जो
✍️ लिखते हैं,
📚 पढ़ते हैं,
😂 हँसते हैं,
और 🤔 सोचते हैं कि “व्यंग्य आखिर किस पर लिखा जाता है?”
⏱️ टाइमस्टैम्प्स (Chapters | हिंदी)
00:00 – धमकी भरी शुरुआत 😄 “सब सावधान हो जाओ”
02:15 – कवि सम्मेलन, ब्लॉगिंग और वरिष्ठ मित्रों का परिचय
05:40 – पत्नी चालीसा और साहित्यिक घरेलू उपाय
09:10 – व्यंग्य, डिस्क्लेमर और असली लोगों का सामने आ जाना
14:30 – राजा का बाजा कहानी और 1998 का असली किस्सा
20:45 – कंटाप vs झापड़: कनपुरिया शब्द विज्ञान
28:10 – ब्लॉग वायरल हुआ और परिवार में भूचाल
35:00 – फिराग गोरखपुरी और साहित्यिक पलटवार
41:30 – कवि सम्मेलन का जादू: संतोष आनंद का प्रसंग
49:20 – दारू छोड़ने पर समाज का अविश्वास 😄
57:40 – चारण शब्द विवाद और “राष्ट्रीय आहत भावना”
01:06:30 – रिश्ते, स्मृतियाँ और संवाद का साहित्य
01:13:00 – मौखिक साहित्य बनाम लिखित साहित्य
01:18:40 – समापन: लिखो, बोलो, पर संभल कर ✍️
https://www.youtube.com/watch?v=BK4r6cRTV-A
नमस्ते दोस्तों! आज हमारे YouTube चैनल का पहला जन्मदिन है और इस खास मौके पर हम शुरू कर रहे हैं एक बहुत ही दिलचस्प ज़ूम सीरीज: 'Life In an HOV Lane'। 🎂🎉
क्या आपने कभी सोचा है कि 90 के दशक या साल 2000 की शुरुआत में जब न Google था, न Facebook और न ही हाथ में सेलफोन, तब विदेशी धरती पर पहली बार उतरने पर क्या बीतती होगी?
जब एयरपोर्ट पर कैब वाला न मिले, रेस्टोरेंट में वेजिटेरियन खाना माँगने के लिए जद्दोजहद करनी पड़े, या अनजाने में पुलिस के हत्थे चढ़ने पर उसे 'कानपुर-लखनऊ' वाले अंदाज़ में समझाने की कोशिश की जाए—ये स्थितियाँ या तो आपको रुला सकती हैं या फिर ताउम्र के लिए एक बेहतरीन 'हास्य-व्यंग्य' बन सकती हैं। 😅
इस वीडियो में क्या है खास:
✅ दिग्गज मेहमान: कविता और हास्य-व्यंग्य की दुनिया के जाने-माने नामचीन साहित्यकार और मित्र।
✅ असली कहानियाँ: नई ज़मीन पर ज़िदगी की 180 डिग्री शुरुआत के मज़ेदार और अजीबोगरीब अनुभव।
✅ साहित्यिक गपशप: ज़ूम पर हुई एक अनौपचारिक और आत्मीय बातचीत।
यह प्लेलिस्ट उन यादों का एक वीडियो रूपांतरण है जिन्हें मैंने साल 2000 में एक ब्लॉग के रूप में शुरू किया था। आशा है कि आपको यह बातचीत और यह नई पहल पसंद आएगी। अपना स्नेह और आशीर्वाद (Like & Subscribe) ज़रूर दें! 🙏
https://www.youtube.com/watch?v=blHHlrXpAxc
"क्या आप पुराने हिंदी ब्लॉगिंग (Hindi Blogging) के दिनों और गुदगुदाते हास्य व्यंग्य (Haasya Vyangya) को याद करते हैं?
'बतरस' के इस पहले भाग में, होस्ट अतुल अरोरा (Atul Arora) ने लोकप्रिय हिंदी ब्लॉगर और महान व्यंग्यकार श्री इंद्र अवस्थी जी ('ठेलूहा') का स्वागत किया है! साथ में हैं अभिनव शुक्ल जी। यह एपिसोड पुराने दोस्तों के मिलने और मजेदार संस्मरणों को फिर से ताज़ा करने के बारे में है।
इंद्र अवस्थी जी, जिन्होंने अपने ब्लॉग 'ठेलूहा' से धूम मचाई थी, सुना रहे हैं अपने बचपन और मोहल्ले के सबसे यादगार चरित्र 'लल्ला बाबा' के किस्से। लल्ला बाबा, जो हर भारतीय मोहल्ले के नायक (Guardian) होते थे, उनके शरारती कारनामे और हास्यपूर्ण प्रसंग आपको हंसने पर मजबूर कर देंगे!
यह वीडियो उन सभी के लिए है जो शुद्ध हिंदी हास्य (Shuddh Hindi Haasya) और पुराने दोस्तों की 'गप्पोष्ठी ' का आनंद लेना चाहते हैं। यह भाग 1 है, अगले भाग के लिए बने रहें!
वीडियो में मुख्य चर्चा के विषय (Timestamps):
[00:49] - इंद्र अवस्थी जी ('ठेलूहा महाराज') का परिचय और उनके लेखन का सफर।
[01:50] - सिएटल में हुए 'झिलमिल' कवि सम्मेलन और गीतों के शुद्धिकरण का आंदोलन।
[03:29] - हिंदी ब्लॉगिंग के शुरुआती दौर (2004) और पुराने ब्लॉगरों से जुड़ी यादें।
[04:23] - 'लल्ला बाबा': हर मोहल्ले में पाए जाने वाले इस अनोखे चरित्र के मज़ेदार संस्मरण।
[06:59] - अशोक पांडे की 'लपू झन्ना' किताब के पात्र और लल्ला बाबा में समानता। जानिए क्या होता है जब कथा के पात्र असल जिंदगी में मुसीबत बन जाते हैं
[11:07] - लल्ला बाबा की गार्डियनशिप का हास्यपूर्ण अनुभव।
[15:02] - हास्य ब्लॉगर 'फुर्सतिया' की सार्वजनिक खिंचाई!
देखने के लिए धन्यवाद! अगर आपको यह व्यंग्य और बातचीत पसंद आई है, तो लाइक करें, शेयर करें और चैनल को सब्सक्राइब करें।
https://www.youtube.com/watch?v=NWrExgmVMw4
इस वीडियो में, अतुल अरोड़ा (Atul Arora) एक बार फिर अपने खास मेहमान, प्रसिद्ध हिंदी ब्लॉगर और व्यंग्यकार ठेलूहा जी के साथ पुरानी यादों और हंसी-मजाक का पिटारा लेकर आए हैं।
इस वीडियो की प्रमुख झलकियाँ (Highlights):
🎵 मजेदार पैरोडी: "कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है..." गीत का शुद्ध हिंदी और व्यंग्यात्मक रूपांतरण ("यदा कदा ये हृदय में विचार आता है")।
🚗 कार एक्सीडेंट का किस्सा: अमेरिका में कार 'Total' होने का एक ऐसा किस्सा जिसे सुनकर आप अपनी हंसी नहीं रोक पाएंगे। कैसे एक दुर्घटना नई कार खरीदने का बहाना बन गई?
🇺🇸 अमेरिका में देसी जीवन: 90 के दशक में बिना इंटरनेट और गूगल के अमेरिका में बसने वाले भारतीयों के खट्टे-मीठे अनुभव।
✍️ ब्लॉगिंग के सुनहरे दिन: पुराने हिंदी ब्लॉगर्स और उस दौर की यादें।
😂 मित्रों के किस्से: किचन में फिसलन और दलेर मेहंदी के गानों पर दोस्तों के मजेदार कारनामे।
यह वीडियो उन सभी के लिए है जो शुद्ध हिंदी हास्य (Hindi Satire), साहित्य और प्रवासियों के जीवन के मजेदार अनुभवों को पसंद करते हैं। रील (Reels) की दुनिया से बाहर निकलकर, कुछ असली और सुकून देने वाली बातचीत का आनंद लें!
वीडियो के मुख्य बिंदु (Timestamps):
00:00 - परिचय और 'यदा कदा' पैरोडी गीत की शुरुआत
02:42 - पैरोडी: तुझे धरा पे निमंत्रित किया है मेरे लिए
06:20 - अमेरिका में कार एक्सीडेंट का मजेदार किस्सा
13:15 - पुराने ब्लॉगिंग के दिनों की यादें (Life in HOV Lane)
14:40 - साउथ इंडियन दोस्त और लुंगी डांस का किस्सा
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https://www.youtube.com/watch?v=-mOR-f7laOw
यह वीडियो कवि सम्मेलन @ समाजवादी बगिया में हुए शानदार काव्य पाठ का है, जिसमें भारत और अमेरिका के प्रतिष्ठित कवि शामिल हुए।
किंग ऑफ़ प्रशिया (King of Prussia) स्थित घर की बगिया, जिसका ख़ुराफ़ाती नाम "समाजवादी पार्क" है, बिना किसी तामझाम के एक यादगार साहित्यिक आयोजन का साक्षी बना। पहली दो कड़ियों में वीना सिन्हा जी (भोपाल, भारत), घनश्याम गुप्त जी और रमन कौल (फिलाडेल्फिया), अनूप भार्गव, और रजनी भार्गव जी (न्यू-जर्सी) ने अपनी बेहतरीन कविताएं सुनाईं। सभी मित्रों ने उनके उत्कृष्ट काव्य पाठ का भरपूर आनंद लिया।
इस तीसरी कड़ी में मेरी एक व्यंग्य रचना कुकुर-पुराण (रोजनामचा पुस्तक में पूर्व प्रकाशित) का छोटा सा हिस्सा सुनिए जो जल्द ही अपने पूरे स्वरूप में इस चैनल पर आएगा.
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नोट: "समाजवादी पार्क" (Samajwadi Park) का किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है। इस रोचक नामकरण के पीछे की कहानी जानने के लिए एक अलग वीडियो जल्द ही आ रहा है!
https://www.youtube.com/watch?v=TvUTFmlLca8
यह वीडियो कवि सम्मेलन @ समाजवादी बगिया में हुए शानदार काव्य पाठ का है, जिसमें भारत और अमेरिका के प्रतिष्ठित कवि शामिल हुए।
किंग ऑफ़ प्रशिया (King of Prussia) स्थित घर की बगिया, जिसका ख़ुराफ़ाती नाम "समाजवादी पार्क" है, बिना किसी तामझाम के एक यादगार साहित्यिक आयोजन का साक्षी बना। इस चौथी कड़ी में अनूप भार्गव जी कुछ मुक्तक सुनाये । सभी मित्रों ने उनके उत्कृष्ट काव्य पाठ का भरपूर आनंद लिया।
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नोट: "समाजवादी पार्क" (Samajwadi Park) का किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है। इस रोचक नामकरण के पीछे की कहानी जानने के लिए एक अलग वीडियो जल्द ही आ रहा है!
https://www.youtube.com/watch?v=Pm4Mu7J8zNU
यह वीडियो कवि सम्मेलन @ समाजवादी बगिया में हुए शानदार काव्य पाठ का है, जिसमें भारत और अमेरिका के प्रतिष्ठित कवि शामिल हुए।
किंग ऑफ़ प्रशिया (King of Prussia) स्थित घर की बगिया, जिसका ख़ुराफ़ाती नाम "समाजवादी पार्क" है, बिना किसी तामझाम के एक यादगार साहित्यिक आयोजन का साक्षी बना। पहली कड़ी में आपने देखा कि वीना सिन्हा जी (भोपाल, भारत), घनश्याम गुप्त जी (फिलाडेल्फिया), अनूप भार्गव, और रजनी भार्गव जी (न्यू-जर्सी) ने अपनी बेहतरीन कविताएं सुनाईं।
इस कड़ी में देखिए मशहूर हिंदी/उर्दू/अंग्रेजी और काश्मीरी ब्लॉगर रमन कौल की कुछ रचनाएँ ।
सभी मित्रों ने उनके उत्कृष्ट काव्य पाठ का भरपूर आनंद लिया।
https://www.youtube.com/watch?v=nYdmHjTutCE
यह वीडियो कवि सम्मेलन @ समाजवादी बगिया : पार्ट १ में हुए शानदार काव्य पाठ का है, जिसमें भारत और अमेरिका के प्रतिष्ठित कवि शामिल हुए।
किंग ऑफ़ प्रशिया (King of Prussia) स्थित घर की बगिया, जिसका ख़ुराफ़ाती नाम "समाजवादी पार्क" है, बिना किसी तामझाम के एक यादगार साहित्यिक आयोजन का साक्षी बना। इस पहली कड़ी में वीना सिन्हा जी (भोपाल, भारत), घनश्याम गुप्त जी (फिलाडेल्फिया), अनूप भार्गव, और रजनी भार्गव जी (न्यू-जर्सी) ने अपनी बेहतरीन कविताएं सुनाईं। सभी मित्रों ने उनके उत्कृष्ट काव्य पाठ का भरपूर आनंद लिया।
इस 52 मिनट के साहित्यिक समारोह में कवियों के काव्य पाठ को समय (Timestamps) के अनुसार देखें:
परिचय एवं उदघोषणा [00:22]
वीना सिन्हा जी का काव्य पाठ [03:28]
घनश्याम गुप्त जी का काव्य पाठ [23:23]
रजनी भार्गव जी का काव्य पाठ [35:05]
अनूप भार्गव जी का काव्य पाठ [40:11]
अगर आपको यह काव्य पाठ पसंद आया तो लाइक करें, शेयर करें और हमारे चैनल को सब्सक्राइब करें ताकि आप ऐसे और साहित्यिक आयोजन देख सकें!
नोट: "समाजवादी पार्क" (Samajwadi Park) का किसी राजनीतिक दल से कोई लेना-देना नहीं है। इस रोचक नामकरण के पीछे की कहानी जानने के लिए एक अलग वीडियो जल्द ही आ रहा है!
https://www.youtube.com/watch?v=sypkxdarDo0
सोशल नेटवर्किंग काम की चीज होती है, युवा वर्ग के लिए भी और उनके लिए भी जो मिड लाइफ क्राइसिस के शिकार हैं, पर इसे सही तरीक़े से क़ैसे विकसित करें जानिये समीर लाल जी से उनकी पुस्तक 360 Connections पर एक बातचीत के ज़रिए।युवा वर्ग के प्रश्न जाहिर है एक युवा ने ही पूछे हैं।
https://www.youtube.com/watch?v=d5XdsaTTfw8
सुबह होती है शाम होती है पर जिंदगी को यूँ ही तमाम नहीं करना है तो सुनिए कैनेडावासी वरिष्ठ व्यंग्यकार एवं लेखक समीर लाल जी की पुस्तक Squeeze the Orange पर एक मनोरंजक बातचीत।
https://www.youtube.com/watch?v=EcHYLG7f4R0
क्या हो जब आप जर्मनी के किसी शहर में हों, आपको एक रंगीन जुलूस दिखे, लोग आपको बियर ऑफर करें और आप उसे कोई आम त्यौहार समझकर नाचने लगें... और बाद में पता चले कि वो Gay Pride Parade थी? और तो और, News Channel आपको "इंडिया से खास परेड के लिए आया" समझकर इंटरव्यू भी ले ले?
इस गुदगुदाने वाले वीडियो में, अतुल अरोरा की मुलाकात होती है मशहूर ब्लॉगर और व्यंग्यकार समीर लाल 'उड़नतश्तरी' (Sameer Lal) से। इस बातचीत में समीर जी सुना रहे हैं अपनी जर्मनी यात्रा का वह 'अलबेला किस्सा' जब वो अनजाने में एक एलजीबीटी (LGBTQ) परेड का हिस्सा बन गए थे और रातों-रात 'सेलिब्रिटी' बन गए। साथ ही, अमेरिका-कनाडा की राजनीति और अवैध प्रवासियों (Illegal Immigrants) पर उनका तीखा व्यंग्य भी सुनने लायक है।
🎬 वीडियो के मुख्य अंश और टाइमस्टैम्प्स:
[04:34] फ्रैंकफर्ट (जर्मनी) का वो 'रंगीन' किस्सा: कैसे फ्लाइट के स्टॉपओवर के दौरान शहर घूमने निकले समीर लाल और उनका परिवार अनजाने में एक भीड़ का हिस्सा बन गया। * [06:19] डांस, बियर और CNN का इंटरव्यू: बियर के जोश में परेड में नाचना, झंडा लहराना और CNN द्वारा यह समझ लेना कि ये भारतीय परिवार खास इसी परेड के लिए आया है।
[07:15] सच्चाई का पता चलना (The Realization): जब एक बैनर का अनुवाद हुआ और पता चला कि यह Rainbow Parade (Gay Pride) है, तो वहां से भागने की अफरा-तफरी और इज्जत बचाने की जद्दोजहद।
* [08:53] कनाडा-अमेरिका और ट्रम्प पर व्यंग्य: क्या कनाडा अमेरिका का 51वां राज्य बन जाएगा? ट्रम्प की वापसी और प्रवासियों की स्थिति पर समीर जी का मजेदार नज़रिया।
[10:09] अवैध प्रवासियों (Illegal Immigrants) पर चर्चा: 18,000 भारतीयों को वापस भेजे जाने और 'डंकी' रूट जैसे मुद्दों पर एक बेबाक राय।
यह वीडियो हास्य, यात्रा संस्मरण और सामाजिक व्यंग्य का एक बेहतरीन मिश्रण है।
https://www.youtube.com/watch?v=KFWmf4Gfbtc
पेश है कुछ मजेदार ख़बरों का पोस्टमार्टम एक कनपुरिया और एक इलाहबादी जोड़ी के हाथों, साथ में कुछ पुरानी गुदगुदाती यादों का जिक्र भी ।
https://www.youtube.com/watch?v=8bbsewm4Aus